Thursday, December 4, 2025

शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति को पहचानो -सतीश सक्सेना

 अक्सर लोग कहते हैं — “कोरोना को वैक्सीन ने खत्म किया लेकिन सच बात यह है कि किसी भी वायरस का
अंतिम अंत केवल एक चीज करती है — मानव शरीर की अपनी प्रतिरक्षा शक्ति , 
वैक्सीन किसी सैनिक की तरह वायरस से नहीं लड़ती , वह सिर्फ शरीर को पहचान कराती है कि “देखो, ऐसा दुश्मन आने वाला है !"

यह ऐसा है जैसे किसी बच्चे को पहले से बता दिया जाए कि कुत्ता कैसा दिखता है ताकि असली कुत्ता दिखने पर वह डरने के बजाय सही प्रतिक्रिया दे !

यानी लड़ाई वैक्सीन ने नहीं, बल्कि शरीर ने लड़ी ,कोरोना संक्रमण हुआ, और शरीर के अंदर की सेना  टी सेल , बी सेल, एंटीबॉडी और मेमोरी सेल इन सबने मिलकर वायरस को पहचानकर खत्म किया।

वायरस शरीर में जितनी तेजी से बढ़ता है, हमारी प्रतिरक्षा उतनी ही तेजी से उसका पीछा करती है और उसे निष्क्रिय बनाती है ! बहुत सारे लोग बिना वैक्सीन के भी ठीक हुए क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत थी !वैक्सीन ने समय रहते मानव शरीर को ट्रेंड कर दिया कि मेरे भयानक रूप से कैसे लड़ना होगा !

पर वायरस को समाप्त करने का काम प्रतिरक्षा शक्ति ने ही किया! वैक्सीन ने प्रतिरक्षा शक्ति को बताया कि यह वायरस का स्वरूप कैसा है मगर उससे अंतिम लड़ाई, अंतिम प्रहार और अंतिम जीत इंसान की प्रतिरक्षा शक्ति ने दी !


Friday, September 12, 2025

अपने कष्ट बताने थे , कुछ दर्द तुम्हारा सुनना था -सतीश सक्सेना

बरसों मन में छिपा रखीं जो बातें, तुमसे कहनी थीं !
सदियों बाद मिले थे तुमसे , बिसरी बातें करनी थी !

उस दिन खूब सोच के आये , घंटों बातें करनी थीं !
तुम्हें देख कर भूल गये हम, जो भी बातें करनी थी !

दिया आँख ने धोखा उस दिन, सारे बंधन टूट गये 
कितने बार पिये थे आंसू, कभी तो गंगा बहनी थी ,!

कितने दिन से सोच रखा था जब भी तुमको देखेंगे !
कुछ अपनी बतलानी थी कुछ तुमसे बातें सुननी थीं 

जब जब हमने कहना चाहा दुनियां के व्यवधानों से 
मुंह पर मेरे ताला था , और बेड़ी तुमने पहनी थी !


Thursday, June 12, 2025

उमस, प्राकृतिक तरीका पसीना निकलने का -सतीश सक्सेना

पसीना वरदान है मजबूत बीमारी रहित शरीर के लिए , त्वचा के

 असंख्य छिद्रों से बहता पसीना हमारे शरीर का ज़हर बाहर फेंकता है और एक पूरा सीजन जिसमें गर्मी और उमस आती है , शरीर से पसीना निकालने में सहायता करता है !

और मूर्ख मानव पंखा तौलिया कूलर एसी तलाश करता है इससे जान छूटाने के लिए , महिलायें तो और भी आगे हैं वे स्किन के इन महीन छिद्रों को क्रीम और पाउडर घुसा कर बंद कर देती हैं !

जय हो आप सबकी महा मानवी, मानवों !

Friday, June 6, 2025

इसे भी पढ़ लें दोस्त -सतीश सक्सेना


मेरा लगभग हर दोस्त जो 70+ का है, तीन चार तरह की दवाएं रोज खाता है चाहे एक ही दवा की आवश्यकता हो मगर डॉ उसकी घबराहट को देख चार पाँच तरह की गोलियां देकर घर भेजता है ताकि उसे भरोसा रहे कि डॉ उसे बचाने का प्रयत्न कर रहा है !

ख़ास तौर पर वे दोस्त जो कि बड़े ओहदे से रिटायर हुए हों अथवा समाज में मशहूर हों या शिष्य मंडली बड़ी हो , बड़े प्रभामंडल से सुसज्जित यह लोग बढ़ती उम्र से सबसे अधिक भयभीत दिखते हैं , अपनी शान में पढ़े कसीदों और तालियों से ताक़त पाते हैं , वे वाक़ई सबसे अधिक ख़तरे में होते हैं और किसी दिन अचानक तालियों की गड़गड़ाहट RIP में बदल जाती है और इस तरह एक शानदार व्यक्तित्व असमय ही मात्र अपनी लापरवाही के कारण संसार से विदा ले लेता है !

क्या आपने कभी सोचा कि 

हर घाव बिना दवा के भर जाता है, ,हर बुखार बिना ऐंटीबायोटिक के उतर जाता है, हर जुकाम कुछ दिन बाद खुद-ब-खुद चला जाता है 

क्यों?

क्योंकि भीतर कोई है जो सदा जाग रहा है ...वही हमारी प्राकृतिक चिकित्सा शक्ति, हमारी इम्यून पॉवर है।

उसने सतीश सक्सेना की जवान रहने की जिद को 70 साल की उम्र में पूरा करवा दिया ! मरने का भय मस्त शरीर को भी समय से पहले मार सकता है , "कुछ हो न जाय "का विचार मात्र , कॉर्टिसोल, एड्रिनलिन ना नामक हार्मोन्स पैदा करते हैं ये हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को रोक देते हैं और हम बिना लड़े ही बीमारियों के सामने आत्मसमर्पण कर बैठते हैं !

बीमारी के समय यह मानना कि “मैं ठीक हो जाऊँगा "शरीर को यह संदेश देता है कि "घबराओ मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ "

मानव शरीर एक जीवित चमत्कार है , हर रोग से लड़ने की शक्ति इसके भीतर है, बशर्ते हम उसे डर से नहीं, भरोसे से देखें 

डॉक्टर और दवाइयाँ अंतिम उपाय हैं  पहला कदम है शरीर को समझना, सुनना और सहारा देना।

डरिए मत, ध्यान दीजिए , शरीर के संकेत समझने की शक्ति विकसित करें , आप योगी , बुद्ध कहलायेंगे !

प्रणाम !

Sunday, April 27, 2025

बीमारी से डरें नहीं -सतीश सक्सेना

जीवन के आख़िरी पड़ाव 70 + में मेरा यह विश्वास व अनुभव है कि भयानक बीमारियों से निजात पानी है तब उससे डरो मत , उसे चैलेंज दो कि वह तुम्हारे शरीर का कुछ नहीं बिगाड पाएगी, आप देखेंगे कि आपकी यह निडरता से आपकी आंतरिक जीवन शक्ति अचानक भरपूर शक्तिशाली हो गई और बीमारी को शरीर से भगाने में आसानी से कामयाब हो गई !

मैंने इसी तरह अपने शरीर से कैंसर नुमा कितने ही सिम्पटम को आसानी से हराने में कामयाबी पायी , घुटने , कमर जांघों के भयानक दर्द , गले से बरसों खाँसते हुए ख़ून निकलना , ४५ वर्ष पुरानी खांसी, दो जगह दुर्दांत गांठें , मुँह गालों के अंदर पड़ी हुई ३० वर्ष पुरानी काले रंग की गाँठ जो आज भी है , मेरा कभी कोई नुक़सान नहीं कर पायीं क्योंकि मैंने कभी उनकी परवाह ही नहीं की और न कैंसर की भयानक कहानियाँ मुझे डरा पायीं !

हमें चाहिए कि अपनी ख़तरनाक बीमारी से बिना डरें आज का दिन का आनंद उठायें , कल सुबह उठकर नए दिन का हँसते हुए स्वागत करें तो पायेंगे कि आपका शरीर कुछ दिनों में हौसला पाकर बहुत ताक़तवर हो गया है और उस बीमारी के भयानक से दिखने वाले सिम्प्टम ख़ुद ब ख़ुद ग़ायब होते जा रहे हैं !

विश्वास बनाए रखें कि आपको बरसों जीना है और हंसते हुए जीना है , लंबा रास्ता जीवंत दिखने लगेगा जहाँ जाओगे फूल मिलेंगे हँसते हुए !

सस्नेह सुनील और Avenindra Mann , 

प्रणाम आप सबको

Monday, October 14, 2024

आदरणीय लोग अधिक ख़तरे में हैं -सतीश सक्सेना

परिवार में दख़लंदाज़ी , बड़प्पन के कारण हर समय तनाव, नींद की कमी ,

अस्वस्थ भोजन के साथ हाई बीपी , मोटापा, शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण बढ़ती डायबिटीज , काफ़ी है आदरणीयों की जान लेने को ! सुबह सुबह वाक करने निकले यह साधन संपन्न लोग अपना सबसे क़ीमती समय, साथ चलते दोस्तों से विगत यशगान करने में बिताते हैं !

आज काल इतने हार्ट अटैक हो रहे हैं उनमें से ऐसा कोई नहीं जो वाक न करता हो , वाक करने का अर्थ यह नहीं कि वह बीमार नहीं पड़ेगा , जीवन में इस प्रकार के निरुत्साह , निरुद्देश्य वाक से कुछ नहीं मिलता , खुश रहकर वाक करना और उस समय एकाग्र चित्त होकर शरीर से बात करना , दिन में कितना और क्या खाते हैं और दिनचर्या क्या है , दवाओं पर निर्भर तो नहीं , तमाम आवश्यक बातें हैं जो मानव कभी सोचता भी नहीं, सुबह वाक करते समय विचार करें एकाग्र होकर और ख़ुद पर लागू करने का संकल्प लें तो उस दिन का वाक सफल मानें !

अभी समय नहीं चला गया आपको आत्मविश्वास बापस लाना होगा और मृत्यु भय का त्याग करना होगा , कायाकल्प संभव है आपकी उम्र में बस एक बार भीष्म प्रतिज्ञा करनी होगी और आप अंत तक स्वस्थ रहकर जीवन का आनंद ले पायेंगे !, सादर 

चमत्कार होगा यकीन करें

Saturday, October 12, 2024

उनके लिए जो वरिष्ठ और सम्मानित हैं -सतीश सक्सेना

अधिकतर महागुरु ( ६० वर्ष से अधिक ) इस बात से चौंकेंगे कि बढ़ती उम्र में वेट लिफ्टिंग सीखना , बॉडी वेट एवं रेजिस्टेंस बैंड एक्सरसाइज उनके लिए आवश्यक ही नहीं , बढ़ती उम्र की आवश्यक जरूरत है और इस

आवश्यकता की पूर्ति के लिए मैं सतीश सक्सेना ( ७०+) यह पूरा वर्ष नौजवानों की तरह जिम ट्रेनिंग में लगाकर अपने शरीर के मसल्स मास को दुबारा ताकत दूँगा और आख़िरी दिन की और बढ़ते हुए भी मैं ,  बढ़ी उम्र में बीमारी मुक्त रहने का संघर्ष जारी रखूँगा !

 कोई डॉ यह नहीं बताता, सबका कहना है कि आराम करिए इस उम्र में नहीं तो आप अपने जॉइंट डैमेज कर लेंगे जबकि तेजी से घटते बॉडी मसल्स और मास को बढ़ाने का सबसे बेहतर तरीका यही है , और हाँ यह मसल्स दुबारा मजबूत बन सकती हैं किसी भी उम्र में, बशर्ते यह विश्वास बना रहे !

मुझे चिंता है उन महर्षियों की जो अपना सारा समय शिष्यों के मध्य ज्ञान बाँटने में गुजारते हैं और अपनी सेहत दवा व्यवसायियों के भरोसे सौंप कर निश्चिंत रहते हैं , अगर नहीं चेते तो कुछ समय में उनके शरीर की दुर्दशा निश्चित है ! “इलाज करा लेंगे “ उन्हें शायद यह पता ही नहीं कि बुढ़ापे में दवाओं के ज़रिये इस शरीर का इलाज संभव ही नहीं , हाँ ढेरों पैसे खर्च कर , वे शरीर में कुछ ख़तरनाक बीमारियां व तीन गुना दवाएं लेकर ही घर वापस आयेंगे !

प्रणाम आप सबको , हो सके तो बिना चिढ़े इस विषय पर ओपन मन से गौर करियेगा ! सादर सस्नेह

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